ऋषिकेश एक यात्रा दर्शन भारत का

ऋषिकेश जो गढ़वाल रेंज में हिमाचल की तलहटी में बसी है और नैसर्गिक प्रकृतिक सुंदरता को एक नवीनतम रूप प्रदान करती है , जहाँ स्वयं भगवान शिव ने समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए विष का पान किया हो और संसार को सृस्टि पालन और त्याग का सर्वश्रेस्थ आदर्श स्थापित किया है , ये धरा है भगवान विष्णु के साक्षात अवतार की जिन्होंने भगवान ऋषिकेश के रूप में इस प्राकृतिक धरा का स्वयं के गुणों से युक्त किया हो , मेरी अवधारणा के हिसाब से जहाँ अलकनंदा , माँ भागीरथी , और अनेकानेक नदिया ऋषि के केश की तरह आकारित हो सृष्टि के कल्याण हेतु स्वयं को माँ जान्हवी के रूप में समाहित कर वृहद् गंगा का रूपांतरण कर आर्यावर्त की इस धरा को पतित पावन बन देती हो , ऐसी धरा जहाँ स्वयं नारायण , भगवान् विष्णु , प्रभु श्री राम , भगवान भरत , भगवान लक्मण , शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा , वेदो के ज्ञाता गुरु वशिष्ट अपने अक्श को इस वसुंधरा में प्रत्यर्पण कर जनकल्याण के लिए अवतरित हो ऐसी वसुधा का नाम ऋषिकेश है … मैने ये महसूस किया जब मोक्षदायनी गंगा के संसर्ग में होते है तो आप उन्हें जीवन से ओतप्रोत ही पाते है वारिद के हर बूद माँ के होने का आभाष कराती है फिर चाहे हो गंगाजल आपके घर में हो या बहाव के तरह हो . माँ जान्हवी सचमुच भारती का स्वरुप है जो भारत के निर्माण के लिए ही इस वसुंधरा पे अवतरित हुई है , आश्रम , मठ,मंदिरो में उठती घंटियों की आवाज , भक्त से भगवान के मिलने के प्रयोजन की तरह लगता है , जहाँ विदेशी आगंतुक भी मंत्रो को जप के भारत के विश्व गुरु होने की अवधारणा को अपनी तस्दीक ही देते है , सूरज की पहली किरण के प्रखरित होने के साथ ही वेदो की ऋचाये योग के माध्यम से सुनाई पड़ने लगती है जहाँ भारतीय कम लेकिन सुदूर देशो से आये हुए लोग भारतीय मूल्यों को आत्मशात करने की प्रेरणादायी उपक्रम करते है .

एक अनुभव हुआ की स्वदेश जितना जिम की तरफ कूच कर रहा है उतना ही विदेश योग की तरफ , एक विनम्र निवेदन कुछ दिन अपने लिए जिए प्रकृति की खोज करे जो चिर है , ईश्वरीय अहसास के साथ सहज हो और आने वाली नस्लों को भी भारतीय संस्कृति से रूबरू कराये //

ऋषिकेश के होटल्स और वहां के लोगो ने मूल्यों को समझा है इसीलिए पर्यटन का ये क्षेत्र हमेशा ही बेहतर हो रहा है /

इस यात्रा के दौरान Aloha on the Ganges , Divine resort Rishikesh , Golden Tulip Haridwar , Aaliya Resort Haridwar का विशेष आभार और सबसे अंत में
इस श्रृंखला के अंतिम कड़ी जिसका जिक्र न हो तो ये यात्रा पूरी नहीं होती वो है अपना प्यारा Mahayana Resort & Spa Rishikesh कुछ लोगो के लिए Anjana सा होगा लेकिन मेरे किये बहुत ख़ास , लक्मण झूला से ०७ किलोमीटर की दूरी पे भगवान नीलकठ के मार्ग पे स्थिति ये रिसॉर्ट्स जिसकी बाहरी धरा को सरिता स्वरूपा माँ खुद सिंचित करती हो और रात में कल कल करती हुई पानी की आवाज माँ की खुशनुमा लोरियों की तरह ही अहसास कराती है , आप सबका विशेष स्नेह मिले अपने कुल के सबसे छोटी विरासत को जिसका किसी से कोई तुलना नहीं है वो अपनी तरह है और अपनों के साथ हिन्दुस्तान की पर्यटन क्षेत्र में बढ़ना चाह्ता है
इसकी विस्तृत जानकारी यहाँ से प्राप्त करे

www.mahayanaresortrishikesh.com

जल्द ही फिर किसी और जगह की यात्रा वृतांत आप सबके लिए लेके आऊंगा /

आपका शैलेन्द्र

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